Wednesday, 8 June 2011

भुला वो लोग, भुलान जो कु काम च.,
हमारी ता दोस्ती का बिना गुजरती नी शाम च..!!
कन्न भूल सकदा हम तुमते,
जू हमारी जिन्दगी कु दुसरु नाम च.!!!!!


द्वारा - शिव सिंह भंडारी

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