Saturday, 25 June 2011

यु हमारू प्यारु गाँव च. और गाँव कु नाम च ( उपगढ़ ) पट्टी - लोस्तु टिहरी गढ़वाल उत्तराखंड

फूल सुख जान्दीन एक वक्त का बाद ,,,,,,

फूल सुख जान्दीन एक वक्त का बाद ,,,,,,
इंसान भी बदल जान्दीन एक वक्त का बाद..!!!
अपणी दोस्ती भी टूटली एक वक्त का बाद.....
लेकिन वो वक्त औलू मेरा मरना का बाद..!!!!       




पल - पल कि दोस्ती कु वादा च आपसी,,,

पल - पल कि दोस्ती कु वादा च आपसी,,,
अपनापन कुछ इथा ज्यादा च आपसी..!!!!
इन्ना सोच्यान कभी भूल जोला आपते....
जिन्दगी भर सतोला यु वादू च आपसी.....!!!!


द्वारा -- शिव सिंह भण्डारी

Thursday, 23 June 2011

फर्क होंदु खाली खुदा और फकीर मा,,

फर्क होंदु खाली खुदा और फकीर मा,,
फर्क होंदु खाली किस्मत और तक़दीर मा...!!!!
अगर कुछ चेंदू च और ना मिलु..,,
ता समज ल्या कुछ और अछू लेख्यु च हाथो की लकीर मा...!!!!                      By - Shiv Singh Bhandari

केगु पैगाम जरा प्यार सी ता पौढ ल्या..

केगु पैगाम जरा प्यार सी ता पौढ ल्या..
केगु प्यार कु एहसास ता कर ल्या..!!
क्वी दिल सी च याद कन्नू आपते..
और आप छन बोना क़ि मेते परेशान न करया.!!!

जिन्दगी गुजर जाए पर प्यार कम ना हो,,,

जिन्दगी गुजर जाए पर प्यार कम ना हो,,,
याद हमें रखना चाहे पास हम हो ना हो..!!!!!
क़यामत तक चलता रहे अपना ये सफ़र.,,,
दुआ करो रब से ये रिश्ता कभी ख़तम ना हो.!!!!!

Tuesday, 14 June 2011

आज उनको मेने खफा कर दिया. ..

आज उनको मेने खफा कर दिया. ..
ऐसा लगा जेसे खुद से दगा कर दिया..!!
उन्हें केसे मनाऊ सोचता रहा दिन भर...
आंसुओ ने भी आने से मन कर दिया..!!!

जिगर का दर्द मा क्वी मरहम लगोंण वालू नी...

जिगर का दर्द मा क्वी मरहम लगोंण वालू नी...
दिल मा लगी आग ते क्वी बुझोण वालू नी...!!
के के सी उम्मीद रोखण ये दुनिया मा.....
सबु न रुलाई च क्वी हसोण वालू नी....!!!!    By - शिव सिंह भण्डारी !

कन होंदीन हर पल मुस्करान वाला...

कन होंदीन हर पल मुस्करान वाला...
सब राज नि होंदीन बातोण वाला...!!!
कभी तन्हाइयो मा ऐ ते देख्यन...
कन रोंदीन सबते हसोण वाला...!!!!
                 बाई - शिव सिंह भण्डारी....

Sunday, 12 June 2011

भरोसा रोख्यन हमारी दोस्ती पर.....

भरोसा रोख्यन हमारी दोस्ती पर.....
हम केगु दिल दुखाया नि करदा...!!!
आप और तुम्हारू अंदाज हमते अछू लगी.....
वरना हम केते दोस्त बनाया नि करदा...!!!
                           शिव सिंह भंडारी

ना हम भुला और ना आप हमते भूल पान....

ना हम भुला और ना आप हमते भूल पान....
गर्दिश मा हम भी नजर ओला..!!!
मुमकिन ता नि हर मोड़ पर मिलणु...
पर आपसी दोस्ती उम्र भर निभोला..!!!           by - Shiv Singh Bhandari

जान न सिर्फ साथ चेंदू...

जान न सिर्फ साथ चेंदू...
सची दोस्ती कु एहसास चेंदू..!!!!
जान ता एक पल मा दिए जांदी.
पर मेते आपकू साथ अपणी आखरी साँस तक चेदी..!!  Shiv Singh Bhandari

चले गए है दूर कुछ पल के लिए....,

चले गए है दूर कुछ पल के लिए....,
मगर है करीब हरपल के लिए.!!!!
केसे भुलायेंगे आपको एक पल के लिए....
जब हो चुकी है दोस्ती उम्र भर के लिए...!!!


शिव सिंह भंडारी

सबसी प्यारु दोस्त बणे मैंन तुमते,..

सबसी प्यारु दोस्त बणे मैंन तुमते,..
फरिस्तो की भीड़ सी चूरे तुमते.!!!
कखी तुम भूल न जान मेते....
इसलिए प्यारु सी कमेन्ट लेखी ते भेजी तुमते..!!!!!!
     शिव सिंह भंडारी

Saturday, 11 June 2011

यख क्वी भी रिश्ता नातू अपणु सगु नि होन्दू..

यख क्वी भी रिश्ता नातू अपणु सगु नि होन्दू..
अब ता दुनिया मा क्वी वादा वफ़ा नि होन्दू.!!!
दुश्मन क़ी दुश्मनी पर बहुत नाज च हमते,..
दोस्तु सी ता हक़ - ए - दोस्ती अदा नि होंदी,!!!



द्वारा = शिव सिंह भंडारी

हर पल पर तुम्हारू ही नाम होलू.,, तुम्हारा हर कदम पर दुनिया कु सलाम होलू...

हर पल पर तुम्हारू ही नाम होलू.,, तुम्हारा हर कदम पर दुनिया कु सलाम होलू...
मुश्किलों कु सामना हिम्मत सी कर्यान ए दोस्त, दुआ च मेरी क़ी एक दिन वक़्त भी तुम्हारू ही गुलाम होलू......                                                     
द्वारा = शिव सिंह भंडारी

Friday, 10 June 2011

वादा ता बहुत छन करया पर...

वादा ता बहुत छन करया पर...
मुश्किल वक़्त छोड़ी ते चली गैन..!!!
बेवफा बोन वो ते या अप्फु ते बेवकूफ..
जिंदगी मा अब तनहा रे गैन !!!!!      By - Shiv Singh Bhandari

दूर जै ते तुमसी दूर नि जै सक्या....

दूर जै ते तुमसी दूर नि जै सक्या.
कथा रोया केथे बथे नि सक्या.!!!!!
गम यु नि की तुम मिल नि सक्या...
दर्द बस यु च कि एक पल ते भी तुमते भूले नि सक्या...!!!   द्वारा - शिव सिंह भंडारी

कभी केसी जुदाई ना करीयान

कभी केसी जुदाई ना करीयान ..
ये दोस्त ते रुसवाई ना करीयान .!!!
जब दिल भर जलु ता मेते बते दयान..
और ना बते ते बेवफाई ना करीयान !!!!          द्वारा - शिव सिंह भंडारी

मेरी तन्हाई कु मेते....

मेरी तन्हाई कु मेते क्वी गिला नी...
क्या व्हे जब क्वी मेते मिली नी..!!!
फिर भी दुआ करदू तुम्हारा वास्ता...
तुमते वो सब मिलु जू मेते अभी तक मिली नी...!!!!

Thursday, 9 June 2011

तुम्हारी पसंद हमारी....

तुम्हारी पसंद हमारी चाहत बण जो..
तुम्हारी मुस्कराहट दिल की रहत बण जो.!!
खुदा खुशियों सी इथा खुश कर दयो आप ते...
की तुमते खुश देखण ते हमारी आदत बण जो..!!!

मुहबत कु पता

मुहबत कु पता केते बताये नि जांदू,....
के भी दोस्त ते कभी भुलाये नि जांदू..!!!
तुमते रख्यु च दिल मा वे जगह पर, ...
जख हर केते सजाये नि जांदू.!!!

अगर दुनिया इथा

अगर दुनिया इथा अच्छी होंदी ता, क्वी यख रवे ते नि औंदु, ..

और अगर इथा बुरी भी होंदी ता,  जांदी दा क्वी केते रुले ते नि जांदू.!!!

मान छा कि सारी दुनिया.....

मान छा कि सारी दुनिया तुम्हारा साह होली...
ख़ुशी का हर लम्हा तुम्हारा पास होला.!!!!
जै दिन उड़ जाली या साँस हमारी ....
वे दिन हमारी कमी कु एहसास जरुर होली..!!!!



शिव सिंह भंडारी द्वारा रचित !!!!

ये भी आदाब हमारा है. तुम्हे क्या मालूम....

 
ये भी आदाब हमारा है. तुम्हे क्या मालूम....
हम तुम्हे जीत के हारे है, तुम्हे क्या मालूम.!!!
एक आप हो कि समझते नहीं हमको अपना..
एक हम है कि तुम्हारे है, तुम्हे क्या मालूम..!!!

जिन्दगी ते एक रंगीन सपना समझा...

जिन्दगी ते एक रंगीन सपना समझा...
दुःख ते सच और सुख ते अपणु समझा.....!!!
भुन चांदा सभी गमो ते त, जिन्गदी मा " मेरा मुख का द्वी बोल "  लेखन वाला त अपणु समझा......!!!!

दिल ते जब ख़ुशी व्हे...!!!

दिल ते जब ख़ुशी व्हे त दिल न दिल सी पूछी कि दिल कन्नू होन्दू.
त दिल न दिल सी बोली कि जू ये कमेन्ट ते दिल सी पढ़णू च दिल वेगु जनु होन्दू......!!!!!  by -
Shiv Singh Bhandari

Wednesday, 8 June 2011

हर कामयाबी पर तुम्हारू नाम होलू..

हर कामयाबी पर तुम्हारू नाम होलू..
तुम्हारा हर कदम पर दुनिया कु सलाम होलू.!!!
मुश्किल्यो कु सामना हिम्मत से कर्यान्न...
मेरी दुआ च की हर एक वक्त भी तुम्हारू गुलाम होलू....!!!!
       द्वारा  - शिव सिंह भंडारी
जे ते मेन अपणु खास दोस्त समजी, वी दोस्ती का नाम पर धब्बा निकली.,,
मेते रोकदू छो दारु पीणा ते, आज वेका ही जेब पर एक देसी कु पव्वा निकली..
भुला वो लोग, भुलान जो कु काम च.,
हमारी ता दोस्ती का बिना गुजरती नी शाम च..!!
कन्न भूल सकदा हम तुमते,
जू हमारी जिन्दगी कु दुसरु नाम च.!!!!!


द्वारा - शिव सिंह भंडारी

बहुत ज्यादा नी चेंदू,

बहुत   ज्यादा   नी   चेंदू,
बस एक मुस्कान ही काफी च...
हमेशा      खुश       रान
बस यी अरमान काफी च...!!!
भुल्यान न हमते कभी आप,
हमते बस तुम्हारू एहसान काफी च.....!!!!